मुक्तक -१

आज का दिवस हमारे देश का~~~ सौभाग्य है।
गगन में लहरा रहा तिरंगा~~~~~अहोभाग्य है।
देश आज के दिन यहाँ~~~तीन रंगों में रंग गया,
करता हूँ नमन तिरंगे को,यह हमारा सौभाग्य है।।
______________रमेश कुमार सिंह/२५-०१-२०१६
पर्यावरण का सुरक्षा  करना हमारा धर्म है
वृक्ष और पौधा लगाना यही हमारा कर्म है
इससे वायुमंडल का संतुलन हो जाता है
पृथ्वी को हरा भरा करना यही सत्कर्म है
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
दुनिया वालों से हमारा एक यही पुकार है।
बच्चों की भान्ति वृक्षों का करना सत्कार है।
वृक्षों से धरा को सजाने और सँवारने के लिए,
वृक्षारोपण कर सभी का करना उपकार है।।
@रमेश कुमार सिंह

कल-कल की ध्वनि साथ लिए।
हवाओं का झोका साथ लिए।
वर्षा रानी नभ से आईं
हर पल की ठन्डी साथ लिए।।
____________रमेश कुमार सिंह/०९-०१-२०१६
मुड़कर देखने वालों की कोई चाहत नहीं होती।
सिर्फ सुरत निहारते हैं, कोई आहट नहीं होती।
मसोसकर रह जाते हैं किसी सौन्दर्य को देखकर,
चली जाती है वो लोगो को कोई राहत नहीं होती।।
______________रमेश कुमार सिंह /११-०१-२०१६

दौलत को पाने के लिए हर परिस्थिति में साथ दिया।
जब पा गया दौलत तो हर परिस्थिति में जबाब दिया।
यही दुनिया की रीत,यहाँ प्रीति को भूल जाते हैं लोग,
निभायेंगे नहीं साथ तुम्हारा अपनों ने आवाज़ दिया।।
___________________रमेश कुमार सिंह /२०-०१-२०१६
क्यूँ लोग ऐसे याद आते हैं।
आने के बाद चले जाते हैं ।
ढुढती रह जाती है निगाहें,
क्यूँ ऐसे लोग को हम पाते हैं।
________रमेश कुमार सिंह

क्या बचपन का शौक है
यह एक अच्छा मौज है
आज पहुँच गये हम वहाँ पर ,
जहां हमेशा के लिए रौब है।।

स्वतंत्रता सेनानी नेता जी  के याद में मेरी चार पंक्तियां आप लोग के समक्ष प्रस्तुत ————-
•••••••••••••••••••••••••••••
हो गया यह देश, लुटेरों का डेरा ।
धुम रहे चतुर्दिश, बनकर सफेरा।
बोस जी की कमी खल रही यहाँ ,
आ जाओ अब सत सत नमन मेरा।
@रमेश कुमार सिंह /२२-०१-२०१६

आपकी स्वीकृति मिल गई। मेरे अन्दर खुशी खिल गई। ऐसे ही साथ देते रहे। हमेशा,/ क्यों कि मेरी अच्छी जग। मिल गई।

कितना बदल गया आज का जमाना।
एक रीति नई है यहाँ दूसरा है पुराना।
भारतीय संस्कृति में कहाँ से आ गई,
क्या है ? मॅाम और माता का तराना।।
________________रमेश कुमार सिंह

••••••••••••••••
श्वेत रंग में उज्जवल मन का विश्वास लिए ।
शितलता की छांव में सुन्दर स्वभाव लिए।
पानी के उपरी परत पर— फिसलते हुए,
प्रकृति के गोद में शांति का भाव लिए।।१।।
•••••
मौन में ही ईश्वर से आराधना कर रहा है।
हँस अपने बारे में– ईश्वर से कह रहा है।
तालाब के बीच, पानी में, आसन लगाये,
तन- मन से लीन होकर मंत्र पढ रहा है।।२।।
_____________रमेश कुमार सिंह /२९-०१-१६
उजड़े चमन में चहकने की खुशियां छाईं है।
हरियाली की जगह पक्षियों ने धूम मचाई है।
रंग – विरंगों में खिला यह वृक्ष— विरानो में,
लगता है विशेष चर्चा में, दूर देश से आईं है।
_________रमेश कुमार सिंह /३०-०१-२०१६
अपने विचारों को प्रवाहमय करें।
हर माहौल को, साहित्यमय करें।
शब्दों का आदान-प्रदान कर यहाँ
साहित्यिक मंच का उदय करें ॥
_____________रमेश कुमार सिंह
मनभावन लिए, मधुमास में ।
प्रेम प्रस्फुटित कर, आस में ।
परस्पर अपनों से बन्दगी कर,
प्रेम दिवस मनाने के प्रयास में।
___________रमेश कुमार सिंह
___________09-02-2016

प्यार से ही प्यार को ऐसे सुला दिया।

जिन्दगी को इस राह से ऐसे छुड़ा दिया।

ले नहीं सका उसके बाहों की छांव को,

मुहब्बत के सफर में ऐसे भूला दिया।
_______________रमेश कुमार सिंह
_______________11-02-2016

आप जल्दी ठीक हो जायें  ईश्वर से करबद्ध प्रार्थना है।
आप स्वास्थ्य  को प्राप्त करें ईश्वर से मेरी अर्चना है।
आपकी आवाज़ तथा परिवार में खुशियां लौट आवें,
आपका शरीर स्वस्थ से भरा पुरा हो यही मेरी वन्दना है।
___________________________रमेश कुमार सिंह
प्रेम रंग ऐसा चढा कि, हम प्रेमी बन गये।
प्रेम रंग में रगा गया मन, हम योगी बन गये।
त्याग कर चले गये, माया रुपी संसार को,
स्नेह का रसपान कर प्रेमवस्त्र भोगी बन गये।
________रमेश कुमार सिंह /१७-०२-२०१६

पद चिह्न छोड़ते हुए रेत के सिवानों में।
राहगीर बन गया अंधेर की दिशाओं में।
जिन्दगी के सफर में कैसा अकेलापन,
सब छोड़कर चल दिया क्यों वीरानों में॥
________________रमेश कुमार सिंह
शान्तिः नहीं है , यहाँ है अशान्ति ।
हम चैन से नहीं है,यहाँ है भ्रान्ति ।
अमन भरा माहौल बनाने के वास्ते,
हम सबको करना है सर्वत्र क्रांति।
_______________रमेश कुमार सिंह
__________________०२-०२-२०१६

वाह बनाया हुआ यह कार ।
इन्सानो ने दिया क्या आकार।
रोड पर जब दौडती है सरपट,
मचाती चलती है हाहाकार।
___________रमेश कुमार सिंह

मुद्रा का चक्कर।
बड़ा घनचक्कर।
दौड़ते फिरते हैं,
लगाते हैं चक्कर।
___रमेश कुमार सिंह
कहीं धुप है– कहीं छाव है।
कहीं सुध है कहीं सुझाव है।
आपस में, सलाह करतें रहे,
कहीं आप हैं कहीं पड़ाव है॥
_________रमेश कुमार सिंह

दिल में गूंजता किसी का विचार था।
जिन्दगी में वो ढुढता एक प्यार था।
काँटों भरा उसका—- इजहार था।
बेबसी भरा उसका—इन्तजार था।
___________रमेश कुमार सिंह
क्या उम्दा पंक्ति बनाईं आपने।
सबको दिशा– दिखाई आपने।
आपस में सलाह मसविरा कर,
लेखनी में खूब रंग लाई आपने।
___________रमेश कुमार सिंह
जन्मदिन पर मित्रों से बहुत मिला मुझे प्रेममय सम्मान।
आशीर्वचन,शुभकामनाओं और स्नेह से हुए धन-धान्य।
शुभ दिवस के दिन स्नेह पाकर मन प्रफुल्लित हो गया।
हृदयतल से कह रहा हूँ आप सभी को सादर धन्यवाद।
_________________रमेश कुमार सिंह /०५-०२-२०१५ ।
दिन ढल जाता है साम हो जाती है ।
अंधेरा छा जाता है रात हो जाती है।
खिल जाता है  फूल मुस्कुराते हुए,
हवाओं के साथ खुशबू फैल जाती है।
_______रमेश कुमार सिंह /०५-०२-२०१५
जहर भी पीना होता तो पी कर दिखा देता,
अगर वो मल्लिका मुझसे दूर नहीं होती।
जहर को अमृत समझकर एक घुट ले लेता,
अगर वह आने एक आवाज़ सुनाई होती।
_____________________रमेश कुमार सिंह

सीखने चला था वो इस बेरहम संसार में।
सीख नहीं पाया लौट आया इस जहान में।
क्या करें दुनिया का दस्तूर देख करके वो,
हाथ पे हाथ रखकर चला गया समशान में॥
____________________रमेश कुमार सिंह

नियोजित नियम से, नहीं हुए बहाल।
इसलिए इनका है– आज बुरा हाल।
सरकार ने तो वोट की रोटी सेक ली,
नियोजित शिक्षक का करके बहाल॥
_______________रमेश कुमार सिंह

कातील निगाहों से मेरे, दिल को घायल कर डाला।
उसको पाने कि खातीर मैं,बन गया यहाँ मतवाला ।
उसकेआने की आहटों से, घुम रहा हूँ यहाँ वहाँ।
मुझको करके मद मस्त यहाँ ,पिलाई जाम का प्याला।

++++++++++++++++++++++++++++++++
तब-तक जिन्दगी यूँ ही इस दुनिया में भटकती रह जायेगी।
जब-तक अधिकारी अपने अधिकार को समझ नहीं पायेगे।
किसी की बेबसी, लाचारी ,मजबूरिया पटकती रह जायेगी।
जब-तक हर कर्मी अपने अन्दर ईन्सानियत रख नहीं पायेंगे।

++++++++++++++++++++++++++++++++

(1)
नव वर्ष में नव-उमंग नव-प्रभात लिए ।
नव-किरण का हर्षमय उल्लास लिए ।
नई-योजना नये संकल्प का भाव लेकर,
नूतन-पथ-प्रण-रस-का आगाज लिए।।
@रमेश कुमार सिंह /२८-१२-२०१५

(2)
नव वर्ष में आप हर्षोल्लास मय हों।
धन-धान्य से परिपूर्ण जीवन सुखमय हो।
असीम खुशियां मिलें आपके जीवन में,
नयी उमंग सह् नव वर्ष मंगलमय हो।।
@रमेश कुमार सिंह /१६-१२-२०१५
नया साल आ रहा है इस बात को याद करें।
बित रहा जो साल,उसका भी ख्याल करें।
गतवर्ष की विदाई,नववर्ष का स्वागत करके,
इस नूतन वर्ष में नया संकल्प का ध्यान करें।
@रमेश कुमार सिंह /२८-१२-२०१५

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
नया वर्ष आ रहा है लोगों में उमंग देखना।
सूर्य की किरणों में अलग तरंग देखना।
खुशियों से परिपूर्ण नववर्ष का प्रथम दिन,
सुनसान जगहों पर एक नया प्रसंग देखना।।
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
@रमेश कुमार सिंह /२९-१२-२०१५

दस्तक दे रहा है नया साल का पहला कदम।
नई उमंग,नई सोच,नई प्रेरणा,दे रहा हरपल।
एकता माधुर्य का एक नया शुभ संदेश लेकर,
बढ रहा है हर क्षण,हरपल सब जगह हरदम।।
@रमेश कुमार सिंह /०२-०१-२०१६
क्या पता ये क्यों इन्सान के रुप में पत्थर बन जन्म लिया है।
पत्थर की भी मूर्तियां किसी की बेबसी पर पिघल जाती है।
इन मूर्तियों में तो ईश्वर ने  शरीर के साथ-साथ जीव दिया है
यही वजह,इनके सामने से किसी की बेबसी निकल जाती है।
___________________________________रमेश कुमार सिंह

आज का दिवस हमारे देश का~~~ सौभाग्य है।
गगन में लहरा रहा तिरंगा~~~~~अहोभाग्य है।
देश आज के दिन यहाँ~~~तीन रंगों में रंग गया,
करता हूँ नमन तिरंगे को,यह हमारा सौभाग्य है।।
______________रमेश कुमार सिंह/२५-०१-२०१६
पर्यावरण का सुरक्षा  करना हमारा धर्म है
वृक्ष और पौधा लगाना यही हमारा कर्म है
इससे वायुमंडल का संतुलन हो जाता है
पृथ्वी को हरा भरा करना यही सत्कर्म है
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
दुनिया वालों से हमारा एक यही पुकार है।
बच्चों की भान्ति वृक्षों का करना सत्कार है।
वृक्षों से धरा को सजाने और सँवारने के लिए,
वृक्षारोपण कर सभी का करना उपकार है।।
@रमेश कुमार सिंह

कल-कल की ध्वनि साथ लिए।
हवाओं का झोका साथ लिए।
वर्षा रानी नभ से आईं
हर पल की ठन्डी साथ लिए।।
____________रमेश कुमार सिंह/०९-०१-२०१६
मुड़कर देखने वालों की कोई चाहत नहीं होती।
सिर्फ सुरत निहारते हैं, कोई आहट नहीं होती।
मसोसकर रह जाते हैं किसी सौन्दर्य को देखकर,
चली जाती है वो लोगो को कोई राहत नहीं होती।।
______________रमेश कुमार सिंह /११-०१-२०१६

दौलत को पाने के लिए हर परिस्थिति में साथ दिया।
जब पा गया दौलत तो हर परिस्थिति में जबाब दिया।
यही दुनिया की रीत,यहाँ प्रीति को भूल जाते हैं लोग,
निभायेंगे नहीं साथ तुम्हारा अपनों ने आवाज़ दिया।।
___________________रमेश कुमार सिंह /२०-०१-२०१६
क्यूँ लोग ऐसे याद आते हैं।
आने के बाद चले जाते हैं ।
ढुढती रह जाती है निगाहें,
क्यूँ ऐसे लोग को हम पाते हैं।
________रमेश कुमार सिंह

क्या बचपन का शौक है
यह एक अच्छा मौज है
आज पहुँच गये हम वहाँ पर ,
जहां हमेशा के लिए रौब है।।

स्वतंत्रता सेनानी नेता जी  के याद में मेरी चार पंक्तियां आप लोग के समक्ष प्रस्तुत ————-
•••••••••••••••••••••••••••••
हो गया यह देश, लुटेरों का डेरा ।
धुम रहे चतुर्दिश, बनकर सफेरा।
बोस जी की कमी खल रही यहाँ ,
आ जाओ अब सत सत नमन मेरा।
@रमेश कुमार सिंह /२२-०१-२०१६

आपकी स्वीकृति मिल गई। मेरे अन्दर खुशी खिल गई। ऐसे ही साथ देते रहे। हमेशा,/ क्यों कि मेरी अच्छी जग। मिल गई।

कितना बदल गया आज का जमाना।
एक रीति नई है यहाँ दूसरा है पुराना।
भारतीय संस्कृति में कहाँ से आ गई,
क्या है ? मॅाम और माता का तराना।।
________________रमेश कुमार सिंह

••••••••••••••••
श्वेत रंग में उज्जवल मन का विश्वास लिए ।
शितलता की छांव में सुन्दर स्वभाव लिए।
पानी के उपरी परत पर— फिसलते हुए,
प्रकृति के गोद में शांति का भाव लिए।।१।।
•••••
मौन में ही ईश्वर से आराधना कर रहा है।
हँस अपने बारे में– ईश्वर से कह रहा है।
तालाब के बीच, पानी में, आसन लगाये,
तन- मन से लीन होकर मंत्र पढ रहा है।।२।।
_____________रमेश कुमार सिंह /२९-०१-१६
उजड़े चमन में चहकने की खुशियां छाईं है।
हरियाली की जगह पक्षियों ने धूम मचाई है।
रंग – विरंगों में खिला यह वृक्ष— विरानो में,
लगता है विशेष चर्चा में, दूर देश से आईं है।
_________रमेश कुमार सिंह /३०-०१-२०१६
अपने विचारों को प्रवाहमय करें।
हर माहौल को, साहित्यमय करें।
शब्दों का आदान-प्रदान कर यहाँ
साहित्यिक मंच का उदय करें ॥
_____________रमेश कुमार सिंह
मनभावन लिए, मधुमास में ।
प्रेम प्रस्फुटित कर, आस में ।
परस्पर अपनों से बन्दगी कर,
प्रेम दिवस मनाने के प्रयास में।
___________रमेश कुमार सिंह
___________09-02-2016

प्यार से ही प्यार को ऐसे सुला दिया।

जिन्दगी को इस राह से ऐसे छुड़ा दिया।

ले नहीं सका उसके बाहों की छांव को,

मुहब्बत के सफर में ऐसे भूला दिया।
_______________रमेश कुमार सिंह
_______________11-02-2016

आप जल्दी ठीक हो जायें  ईश्वर से करबद्ध प्रार्थना है।
आप स्वास्थ्य  को प्राप्त करें ईश्वर से मेरी अर्चना है।
आपकी आवाज़ तथा परिवार में खुशियां लौट आवें,
आपका शरीर स्वस्थ से भरा पुरा हो यही मेरी वन्दना है।
___________________________रमेश कुमार सिंह
प्रेम रंग ऐसा चढा कि, हम प्रेमी बन गये।
प्रेम रंग में रगा गया मन, हम योगी बन गये।
त्याग कर चले गये, माया रुपी संसार को,
स्नेह का रसपान कर प्रेमवस्त्र भोगी बन गये।
________रमेश कुमार सिंह /१७-०२-२०१६

पद चिह्न छोड़ते हुए रेत के सिवानों में।
राहगीर बन गया अंधेर की दिशाओं में।
जिन्दगी के सफर में कैसा अकेलापन,
सब छोड़कर चल दिया क्यों वीरानों में॥
________________रमेश कुमार सिंह
शान्तिः नहीं है , यहाँ है अशान्ति ।
हम चैन से नहीं है,यहाँ है भ्रान्ति ।
अमन भरा माहौल बनाने के वास्ते,
हम सबको करना है सर्वत्र क्रांति।
_______________रमेश कुमार सिंह
__________________०२-०२-२०१६

वाह बनाया हुआ यह कार ।
इन्सानो ने दिया क्या आकार।
रोड पर जब दौडती है सरपट,
मचाती चलती है हाहाकार।
___________रमेश कुमार सिंह

मुद्रा का चक्कर।
बड़ा घनचक्कर।
दौड़ते फिरते हैं,
लगाते हैं चक्कर।
___रमेश कुमार सिंह
कहीं धुप है– कहीं छाव है।
कहीं सुध है कहीं सुझाव है।
आपस में, सलाह करतें रहे,
कहीं आप हैं कहीं पड़ाव है॥
_________रमेश कुमार सिंह

दिल में गूंजता किसी का विचार था।
जिन्दगी में वो ढुढता एक प्यार था।
काँटों भरा उसका—- इजहार था।
बेबसी भरा उसका—इन्तजार था।
___________रमेश कुमार सिंह
क्या उम्दा पंक्ति बनाईं आपने।
सबको दिशा– दिखाई आपने।
आपस में सलाह मसविरा कर,
लेखनी में खूब रंग लाई आपने।
___________रमेश कुमार सिंह
जन्मदिन पर मित्रों से बहुत मिला मुझे प्रेममय सम्मान।
आशीर्वचन,शुभकामनाओं और स्नेह से हुए धन-धान्य।
शुभ दिवस के दिन स्नेह पाकर मन प्रफुल्लित हो गया।
हृदयतल से कह रहा हूँ आप सभी को सादर धन्यवाद।
_________________रमेश कुमार सिंह /०५-०२-२०१५ ।
दिन ढल जाता है साम हो जाती है ।
अंधेरा छा जाता है रात हो जाती है।
खिल जाता है  फूल मुस्कुराते हुए,
हवाओं के साथ खुशबू फैल जाती है।
_______रमेश कुमार सिंह /०५-०२-२०१५
जहर भी पीना होता तो पी कर दिखा देता,
अगर वो मल्लिका मुझसे दूर नहीं होती।
जहर को अमृत समझकर एक घुट ले लेता,
अगर वह आने एक आवाज़ सुनाई होती।
_____________________रमेश कुमार सिंह

सीखने चला था वो इस बेरहम संसार में।
सीख नहीं पाया लौट आया इस जहान में।
क्या करें दुनिया का दस्तूर देख करके वो,
हाथ पे हाथ रखकर चला गया समशान में॥
____________________रमेश कुमार सिंह

नियोजित नियम से, नहीं हुए बहाल।
इसलिए इनका है– आज बुरा हाल।
सरकार ने तो वोट की रोटी सेक ली,
नियोजित शिक्षक का करके बहाल॥
_______________रमेश कुमार सिंह

कातील निगाहों से मेरे, दिल को घायल कर डाला।
उसको पाने कि खातीर मैं,बन गया यहाँ मतवाला ।
उसकेआने की आहटों से, घुम रहा हूँ यहाँ वहाँ।
मुझको करके मद मस्त यहाँ ,पिलाई जाम का प्याला।

++++++++++++++++++++++++++++++++
तब-तक जिन्दगी यूँ ही इस दुनिया में भटकती रह जायेगी।
जब-तक अधिकारी अपने अधिकार को समझ नहीं पायेगे।
किसी की बेबसी, लाचारी ,मजबूरिया पटकती रह जायेगी।
जब-तक हर कर्मी अपने अन्दर ईन्सानियत रख नहीं पायेंगे।

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(1)
नव वर्ष में नव-उमंग नव-प्रभात लिए ।
नव-किरण का हर्षमय उल्लास लिए ।
नई-योजना नये संकल्प का भाव लेकर,
नूतन-पथ-प्रण-रस-का आगाज लिए।।
@रमेश कुमार सिंह /२८-१२-२०१५

(2)
नव वर्ष में आप हर्षोल्लास मय हों।
धन-धान्य से परिपूर्ण जीवन सुखमय हो।
असीम खुशियां मिलें आपके जीवन में,
नयी उमंग सह् नव वर्ष मंगलमय हो।।
@रमेश कुमार सिंह /१६-१२-२०१५
नया साल आ रहा है इस बात को याद करें।
बित रहा जो साल,उसका भी ख्याल करें।
गतवर्ष की विदाई,नववर्ष का स्वागत करके,
इस नूतन वर्ष में नया संकल्प का ध्यान करें।
@रमेश कुमार सिंह /२८-१२-२०१५

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
नया वर्ष आ रहा है लोगों में उमंग देखना।
सूर्य की किरणों में अलग तरंग देखना।
खुशियों से परिपूर्ण नववर्ष का प्रथम दिन,
सुनसान जगहों पर एक नया प्रसंग देखना।।
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@रमेश कुमार सिंह /२९-१२-२०१५

दस्तक दे रहा है नया साल का पहला कदम।
नई उमंग,नई सोच,नई प्रेरणा,दे रहा हरपल।
एकता माधुर्य का एक नया शुभ संदेश लेकर,
बढ रहा है हर क्षण,हरपल सब जगह हरदम।।
@रमेश कुमार सिंह /०२-०१-२०१६
क्या पता ये क्यों इन्सान के रुप में पत्थर बन जन्म लिया है।
पत्थर की भी मूर्तियां किसी की बेबसी पर पिघल जाती है।
इन मूर्तियों में तो ईश्वर ने  शरीर के साथ-साथ जीव दिया है
यही वजह,इनके सामने से किसी की बेबसी निकल जाती है।
___________________________________रमेश कुमार सिंह

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